अब ट्रम्प को बर्ख़ास्त करने की मांग तेज़ होती जा रही है और इसके लिए संविधान के 25वें संशोधन को इस्तेमाल करने पर ज़ोर दिया जा रहा है। मगर उप राष्ट्रपति माइक पेन्स जो ख़ुद भी ट्रम्प से कम नस्लवादी नहीं हैं ट्रम्प को बर्ख़ास्त करने की कार्यवाही नहीं करना चाहते। इस तरह हो सकता है कि प्रतिनिधि सभा की चेयर परसन नेन्सी पेलोसी अपने अधिकार का प्रयोग करते हुए ट्रम्प पर महाभियोग चलाएं।
इस समय ट्रम्प को संविधान का पावर इस्तेमाल करके पद से हटाने की मांग तो चल रही है लेकिन इस बहस में यह बिंदु नज़रअंदाज़ किया जा रहा है कि बर्खास्त होने के बाद ट्रम्प जैसा जुनूनी व्यक्ति क्या क़दम उठा सकता है यह किसी को नहीं मालूम, वह केवल अमरीका के ख़िलाफ़ नहीं बल्कि विश्व के खिलाफ़ वह कोई पागलपन कर सकता है। सबसे पहले तो उनसे परमाणु हथियारों के कोड और बटन छीनना ज़रूरी है।
यह भी कहा जा रहा है कि अगर ट्रम्प के साथ यह बर्ताव किया गया तो वह अपने समर्थकों के बीच और भी बड़े चैंपियन बन जाएंगे मगर यह भी तो है कि अगर ट्रम्प को इसी तरह आज़ाद छोड़ दिया गया तो वह इतना बड़ा संकट पैदा कर सकते हैं जिससे बाहर निकलना अमरीका के लिए असंभव होगा। ट्रम्प ज़ख़्मी भेड़िए की तरह हर तरफ़ हमला कर रहे हैं। उनको लगता है कि अब उनके पास खोने के लिए कुछ नहीं है।
न्यूयार्क टाइम्ज़ के मशहूर स्तंभकार थामस फ़्रेडमैन ने हाल ही में अपने लेख में लिखा कि उन्होंने 1975 में लेबनान के गृह युद्ध की कवरेज के साथ अपनी पत्रकारिता शुरू की मगर आशा करते हैं कि यह कैरियर अमरीका के गृह युद्ध की कवरेज पर ख़त्म न हो।
हमको तो लगता है कि फ़्रेडमैन की यह कामना पूरी नहीं होगी क्योंकि अमरीका बड़ी स्पीड से गृह युद्ध की ओर जा रहा है। शायद अमरीका के सारे राज्य बहुत दिन तक एक साथ न रह पाएं और इस देश का अंजाम सोवियत संघ से बुरा हो।
यह तो हमें याद है कि ट्रम्प को 74 मिलियन वोट मिले जिनमें अधिकतर मतदाता वह गोरे हैं जो नस्लभेदी विचार रखते हैं। देश के 18 राज्यों में वह बहुसंख्यक हैं। ट्रम्प उन्हें लगातार उकसा रहे हैं।
अमरीका के इस ख़तरनाक ड्रामे का अंजाम क्या होता है यह तो आने वाला समय बताएगा मगर इस बीच सबसे ख़तराक स्थिति इस्लामी व अरब दुनिया की उन सरकारों की होगी जिन्होंने अपना सब कुछ अमरीका के क़दमो में डाल दिया है।
अब्दुल बारी अतवान
अरब जगत के विख्यात लेखक व टीकाकार